• Latest
IRS officer Nesha Oraon champions cultural revival to protect tribal roots in Jharkhand

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: आदिवासी आस्था की कानूनी मान्यता ने झारखंड की ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ योजना को दी नई उम्मीद

10 November 2025
Jharkhand’s path inspired by Jaipal Singh Munda, Baba Dishom Guruji: CM

Jharkhand’s path inspired by Jaipal Singh Munda, Baba Dishom Guruji: CM

23 January 2026
Parakram Diwas celebrated at historic Gomoh station to honour Netaji Subhas Chandra Bose

Parakram Diwas celebrated at historic Gomoh station to honour Netaji Subhas Chandra Bose

23 January 2026
BJP state chief Aditya Sahu visits family of missing industrialist’s son in Jamshedpur

BJP state chief Aditya Sahu visits family of missing industrialist’s son in Jamshedpur

23 January 2026
Jharkhand engages Historic England to seek global recognition for Megalithic heritage

Jharkhand engages Historic England to seek global recognition for Megalithic heritage

23 January 2026
Austria’s TU Leoben signs MoU with IIT ISM Dhanbad for academic, research collaboration

Austria’s TU Leoben signs MoU with IIT ISM Dhanbad for academic, research collaboration

23 January 2026
Supreme Court dismisses advocate’s plea against Jharkhand HC contempt notice

Supreme Court dismisses advocate’s plea against Jharkhand HC contempt notice

23 January 2026
The Jharkhand Story
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Advertise with us
  • About Editor
  • About Us
  • Contact
Saturday, January 24, 2026
  • Home
  • Election
  • Politics
  • Judiciary
  • Governance
  • Crime
  • Industries & Mining
  • Health
  • Tribal Issues
  • Education
  • Sports
  • More
    • Life Style
    • Jobs & Careers
    • Tourism
    • Opinion
    • Development Story
    • Science & Tech
    • Climate & Wildlife
    • Corruption
    • News Diary
No Result
View All Result
The Jharkhand Story
No Result
View All Result
Home Breaking

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: आदिवासी आस्था की कानूनी मान्यता ने झारखंड की ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ योजना को दी नई उम्मीद

Jharkhand Story by Jharkhand Story
10 November 2025
in Breaking, Opinion, Tribal Issues
IRS officer Nesha Oraon champions cultural revival to protect tribal roots in Jharkhand
Share on FacebookShare on Twitter

निशा उरांव

 

“हमारी परंपरा हमारी विरासत” एक दस्तावेजीकरण की योजना है, जिसकी परिकल्पना झारखंड राज्य में की गई थी। झारखंड सरकार में बतौर निदेशक पंचायती राज के पद पर प्रतिनियुक्ति के दौरान , मैंने “हमारी परंपरा, हमारी विरासत” पहल की कल्पना की थी। इस अभियान को झारखंड के पारंपरिक आदिवासी अगुआ के सहयोग से बनाया तथा संचालन किया गया था। यह योजना- आदिवासी रीति रिवाज, प्रथा, पूजा पद्दति, गीत, पारंपरिक जीवन शैली, इत्यादि, के दस्तावेज़ीकरण की  योजना थी । “हमारी परंपरा हमारी विरासत” को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था और आज इसके “शपथ पत्र” , मोड्यूल तथा प्रारूप  को देश के सभी 10 PESA राज्यों में इसे लागू करने की तैयारी चल रही है ।

सबसे पहले छत्तीसगढ़ राज्य ने इस अभियान को अपनाया है तथा उसी “शपथ पत्र” को 14 अगस्त 2025 को परिचालित किया है  । कांकेर जिले की कुछ ग्राम सभाओं ने अपने गांवों में सूचना पट्ट लगाए थे, जिनमें ईसाई प्रार्थना सभा हेतु सभी तरह के प्रवेश को प्रतिबंधित किया था।   इसी सूचना पट्टी के विरुद्ध याचिका दायर कर यह दावा किया गया था कि यह कार्रवाई निदेशक, पंचायती राज द्वारा जारी परिपत्र के आधार पर हुई है, जिसमें “हमारी परंपरा हमारी विरासत” योजना का शपथ पत्र का उल्लेख था। याचिका में इस “शपथ पत्र” और सूचना पट्टा को असंवेधैनिक बताया गया था ।

 किंतु अदालत ने फ़ैसला सुनाया कि “हमारी परंपरा, हमारी विरासत” योजना के तहत जारी किए गए शपथ पत्र और ग्राम सभाओं द्वारा धर्मांतरण गतिविधियों को प्रतिबंधित करने वाले नोटिस बोर्ड कानूनी रूप से वैध हैं तथा संवेधैनिक हैं ।

अदालत का निर्णय, केवल एक न्यायिक फैसला नहीं है —बल्कि आदिवासी समाज के पारंपरिक स्वशासन और धार्मिक अधिकारों की विजय है। इस निर्णय के अनुसार ग्राम सभाएँ अपने पारंपरिक धर्म, संस्कृति और सामाजिक जीवन की रक्षा स्वयं कर सकती हैं। “हमारी परंपरा हमारी विरासत” योजना का मूल उद्देश्य भी यही था — कि ग्राम सभा अपनी जड़ों से जुड़े और अपनी धर्म तथा परंपरा की रक्षा स्वयं करे।

ALSO READ: Ghatshila Bypoll: Prestige battle turns personal between Hemant and Champai 

झारखंड के सपने को छत्तीसगढ़ ने साकार किया

“हमारी परंपरा, हमारी विरासत” योजना की शुरुआत झारखंड में हुई थी। इसकी परिकल्पना मेरे नेतृत्व में पंचायती राज विभाग ने आदिवासी समुदायों के सहयोग से की थी, और इसे भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत मंजूरी भी मिली थी।

इस योजना का उद्देश्य सरल लेकिन गहरा था — ग्राम सभाओं को उनके पारंपरिक धर्म, त्योहारों, पूजा प्रणालियों, गीतों और रीति-रिवाजों को दस्तावेजित करने और सुरक्षित रखने में मदद करना। इस योजना की शपथ किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं थी, बल्कि यह आदिवासी धार्मिक आस्था को जीवित रखने और उनकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा थी, जो आदिवासी पहचान की नींव हैं।

छत्तीसगढ़ पहला राज्य बना जिसने झारखंड के इस कार्यक्रम को आधिकारिक रूप से अपनाया और लागू किया — और अब उसे न्यायिक समर्थन भी मिल गया है। किंतु विडंबना यह है कि जिस झारखंड राज्य में यह विचार जन्मा था, वहीं कुछ ईसाई-आदिवासी समूहों के दबाव में इस योजना को बीच में ही रोक दिया गया । ऐसा प्रतीत होता है कि इन समूह को आशंका थी कि यह पहल आदिवासी धार्मिक पहचान को मजबूत करेगी।

फिर भी,  आदिवासी अगुआ और समाज का ना तो उत्साह ही कम हुआ और ना यह अभियान रुका । मेरे सहयोग से , इस अभियान को अब उरांव, खड़िया, मुंडा और संथाली समुदायों द्वारा स्वयं आगे बढ़ाया जा रहा है। और अब तक तीन गांवों में दस्तावेज़ीकरण का कार्य पूरा किया है । काम जारी है।

इसे रोके जाने से पूर्व, झारखंड की लगभग 3,800 ग्राम सभाएं इस शपथ को ले चुकी थीं और दस्तावेज़ीकरण का काम शुरू हो चुका था। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का फैसला इस योजना एक कानूनी और नैतिक आधार प्रदान करता है।

कोर्ट ने क्या कहा और यह क्यों महत्वपूर्ण है

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2025 को दिए अपने फैसले में कांकेर जिले के कई गांवों की ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्तावों और लगाए गए नोटिस बोर्डों को वैध बताया। इन ग्राम सभाओं ने सूचना पट्टी के अध्यम से अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए PESA अधिनियम, 1996 की धारा 4(d) और छत्तीसगढ़ राज्य PESA नियम, 2022 की धारा 6(10) के तहत अपने अधिकारों की घोषणा की थी । अदालत ने कहा कि यह कदम कानूनी और संवैधानिक दायरे में हैं।

संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने का अधिकार देता है, लेकिन बल, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं देता है । अनुच्छेद 25 का अधिकार किसी ख़ास एक समुदाय के लिए नहीं –  बल्कि यह देश के हर नागरिक और समुदाय का मूल अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम सभाओं ने किसी के प्रवेश या निवास पर रोक नहीं लगाई थी, बल्कि केवल अपने गांवों में धर्म परिवर्तन की गतिविधियों पर रोक लगाई थी।

इस प्रकार, ग्राम सभा के प्रस्ताव और राज्य सरकार का 14 अगस्त 2025 का “शपथ पत्र” ( जो की झारखंड राज्य के प्रारूप पर आधारित था ) , दोनों को संवैधानिक सीमाओं के भीतर पाया गया याचिकाओं को निरस्त करते हुए अदालत ने शिकायतकर्ताओं को PESA नियम 2022 के तहत ग्राम सभा या उप-समाहर्ता से संपर्क करने का निर्देश दिया — यह स्थानीय आदिवासी संस्थानों की स्वायत्तता की पुनः पुष्टि है।

झारखंड और अन्य PESA राज्यों के लिए सबक

यह फैसला सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव पूरे देश में, खासकर झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे अन्य PESA राज्यों में पड़ेगा। झारखंड राज्य के आदिवासी समुदाय पर इस ऐतिहासिक निर्णय का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

झारखंड में, जहां आदिवासी स्वशासन की ऐतिहासिक परंपरा रही है, ग्राम सभाओं ने समय-समय पर ऐसे ही अधिकारों का दावा किया है। हाल ही में नामकुम ब्लॉक के लाल खटांगा गांव में ग्राम सभा ने “मुक्ति महोत्सव” का विरोध करते हुए प्रस्ताव पारित किया, जिसे उसने धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने वाला और शांति भंग करने वाला बताया। इसके बावजूद यह कार्यक्रम 3 से 5 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ।

अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले से झारखंड की ग्राम सभाओं को अपने धर्म, ज़मीन और परंपराओं की रक्षा के लिए संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करने की कानूनी स्पष्टता और आत्मविश्वास मिला है।

PESA की भावना आदिवासी समुदायों को स्वशासन और सांस्कृतिक संरक्षण का अधिकार देती है। छत्तीसगढ़ का यह फैसला उसी भावना का प्रतीक है ।

झारखंड के लिए यह आत्मनिरीक्षण और अवसर का समय है। “हमारी परंपरा, हमारी विरासत”  योजना केवल फाइलों में बंद नहीं रहनी चाहिए। इसे फिर से शुरू कर, दस्तावेजित कर, और नई प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि आदिवासी धर्म और संस्कृति सम्मानपूर्वक फल-फूल सकें।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह निर्णय साबित करता है कि आदिवासी धर्म की रक्षा किसी समुदाय का बहिष्कार नहीं, बल्कि समाज के संवेधिनिक अधिकार का पालन है तथा यह अपने प्राचीन विरासत और विश्वास प्रणाली को जीवित रखने का प्रयास है। अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा करना हर समुदाय का मौलिक अधिकार है। न्यायालय का यह निर्णय जनजातीय समाज की उस संवैधानिक भावना को सशक्त करता है, जिसके अनुसार ग्राम सभाएँ अपने पारंपरिक धर्म, संस्कृति और सामाजिक जीवन की रक्षा स्वयं कर सकती हैं।

जो समुदाय अपनी जड़ों की रक्षा करता है, वही अपने भविष्य को सुरक्षित रखता है।

(लेखिका एक IRS अधिकारी हैं, जो अपनी आदिवासी जड़ों से गहरे जुड़ी हैं और स्वदेशी संस्कृति को बढ़ावा देने तथा संरक्षित करने के अपने सक्रिय प्रयासों के लिए जानी जाती हैं। झारखंड की निवासी, वह ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी परंपराओं की पहचान, सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की समर्थक रही हैं। वर्तमान में यह पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार, के “प्रोग्राम एडवाइजरी बोर्ड” की सदस्य हैं, तथा राँची में बतौर अतिरिक्त आयकर आयुक्त पदस्थापित हैं।  )

Tags: Chhattisgarh High Court Judgement 2025Indigenous Faith IndiaJharkhand PESA ImplementationPESA अधिनियम 1996tribal self-governanceआदिवासी आस्थाआदिवासी संस्कृति संरक्षणग्राम सभा अधिकारछत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसलाझारखंड “हमारी परंपराहमारी विरासत” योजना
ShareTweetShareSendSendShare
Next Post
294 MBBS seats filled in first counselling across four Jharkhand medical colleges

Surname issue complicates MBBS admission of tribal girl in SNMMCH Dhanbad

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Advertise with us
  • About Editor
  • About Us
  • Contact
Mail us : thejharkhandstory@gmail.com

© 2025 The Jharkhand Story

No Result
View All Result
  • Home
  • Election
  • Politics
  • Judiciary
  • Governance
  • Crime
  • Industries & Mining
  • Health
  • Tribal Issues
  • Education
  • Sports
  • More
    • Life Style
    • Jobs & Careers
    • Tourism
    • Opinion
    • Development Story
    • Science & Tech
    • Climate & Wildlife
    • Corruption
    • News Diary