द झारखंड स्टोरी नेटवर्क
जमशेदपुर, घोड़ाबांधा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शनिवार को जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरहुल महापर्व मनाया। इस अवसर पर उन्होंने सपरिवार सरहुल पूजा-अर्चना कर प्रकृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ राज्य और देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण के लिए प्रार्थना की।

सरहुल आदिवासी संस्कृति और प्रकृति आस्था का प्रतीक
इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरहुल पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जल, जंगल व जमीन की रक्षा करने का संदेश देता है।

पर्यावरण संकट के दौर में प्रकृति से जुड़ने की सीख
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, जंगलों की कटाई और जैव विविधता के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में सरहुल जैसे पारंपरिक पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की सीख देते हैं।

सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का संदेश
अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है। यह पर्व समाज में पारस्परिक सद्भाव, सहयोग और एकता को मजबूत करता है तथा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की पारंपरिक संस्कृति आज वैश्विक पर्यावरण संकट के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देती है।







