Palamu Tiger Reserve recovers snares, arrows in anti-poaching patrol ahead of DussehraBokaro Steel Plant Blockade: Jharkhand HC acts during Puja holidays, all 11 gates reopenedCM Hemant Soren performs traditional dashakarma rituals for late mother Rupi Soren in NemraKolkata Durga Puja Stampede: At least 17 feared dead after rain triggers rush at Chorbagan pandalPalamu food safety team seizes expired burger buns, destroys contaminated chow mein and pedasLatehar SP urges youth to preserve and promote Nagpuri languageFreight train derailment disrupts rail traffic in Chakradharpur divisionClear skies to boost Durga Puja festivities as Jharkhand braces for morning mist

चुनावी झटकों के बाद झारखंड भाजपा का रीसेट: गजेंद्र पटेल के बाद पवन साय को संगठन की कमान

सुमन श्रीवास्तव रांची, 24 सितंबर: लगातार दो विधानसभा चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद भाजपा ने झारखंड में अपने…

चुनावी झटकों के बाद झारखंड भाजपा का रीसेट: गजेंद्र पटेल के बाद पवन साय को संगठन की कमान

Pawan Sai

सुमन श्रीवास्तव

रांची, 24 सितंबर: लगातार दो विधानसभा चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद भाजपा ने झारखंड में अपने संगठन को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह पटेल को प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद अब पवन साय को प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। पवन साय का मुख्यालय रांची होगा।

Advertisement
Advertisement

एक के बाद एक हुई इन नियुक्तियों को झारखंड को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के बढ़े हुए फोकस के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने जहां आदिवासी चेहरे गजेंद्र पटेल को झारखंड का प्रभारी बनाया है, वहीं संगठन की बागडोर लंबे समय तक आरएसएस के प्रचारक रहे पवन साय को सौंपकर जमीनी संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया है।

2019 और 2024 के झटकों के बाद संगठन पर फोकस

झारखंड में भाजपा को 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में सत्ता हासिल करने में सफलता नहीं मिली। ऐसे में नई नियुक्तियां केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि राज्य में पार्टी की राजनीतिक रणनीति को नए सिरे से तैयार करने की कवायद के रूप में देखी जा रही हैं।

Stay informed. Get Jharkhand's top stories in your inbox.

Free. No spam. Unsubscribe anytime.

गजेंद्र पटेल की नियुक्ति से भाजपा ने आदिवासी प्रतिनिधित्व और जनजातीय क्षेत्रों में संगठनात्मक पहुंच को प्रमुखता दी है। वहीं पवन साय को संगठन महामंत्री बनाए जाने से पार्टी के बूथ स्तर तक संगठन, कार्यकर्ताओं के समन्वय और चुनावी मशीनरी को मजबूत करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।

कौन हैं पवन साय?

पवन साय मूल रूप से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दुलदुला तहसील के ग्राम सिरिमकेला के रहने वाले हैं। उन्होंने एनईएस कॉलेज, जशपुर से इतिहास में एमए किया है।

Advertisement
Advertisement

वह 1993 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और इसके बाद संगठन में लगातार विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। 1997 में वह सक्ती के खंड प्रचारक बने। इसके बाद 1998 से 2000 तक सरगुजा, 2000 से 2006 तक बिलासपुर और 2006 से 2009 तक सरगुजा के विभाग प्रचारक रहे। 2009 से 2013 तक उन्होंने दक्षिण बस्तर में विभाग प्रचारक की जिम्मेदारी संभाली।

2013 में उन्हें भाजपा में बिलासपुर संभाग का संभाग संगठन मंत्री बनाया गया। 2014 से 2016 तक वह छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश सह-संगठन मंत्री रहे और अप्रैल 2016 से सितंबर 2026 तक प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी संभाली।

करीब एक दशक तक छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री के रूप में काम करने के बाद अब उन्हें झारखंड भेजा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, संगठनात्मक स्तर पर उनका लंबा आरएसएस अनुभव और छत्तीसगढ़ भाजपा में काम करने का अनुभव उनकी नई जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण होगा।

Advertisement
Advertisement

कर्मवीर सिंह की जगह अब पवन साय

झारखंड भाजपा के मौजूदा प्रदेश महामंत्री (संगठन) कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ भेजा गया है। उन्हें छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह दोनों राज्यों के संगठन महामंत्रियों की जिम्मेदारियों में अदला-बदली हुई है।

पवन साय की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब झारखंड भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नए संगठन महामंत्री के सामने कार्यकर्ताओं में समन्वय बढ़ाने, बूथ स्तर के नेटवर्क को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की चुनौती होगी।

गजेंद्र पटेल और पवन साय की जोड़ी पर नजर

गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड का प्रभारी बनाए जाने के बाद उनके साथ सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। गजेंद्र पटेल आदिवासी नेता हैं और खरगोन से सांसद तथा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

इस नई टीम में गजेंद्र पटेल के सामने जहां राजनीतिक और सामाजिक पहुंच का विस्तार करने की चुनौती होगी, वहीं पवन साय संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर काम करेंगे। इससे भाजपा के झारखंड अभियान में आदिवासी outreach, बूथ संगठन, कार्यकर्ता समन्वय और सामाजिक समीकरण एक साथ प्रमुख एजेंडे में दिखाई दे रहे हैं।

Saudan Singh

सौदान सिंह की वापसी से बढ़ी संगठनात्मक गंभीरता

भाजपा ने वरिष्ठ संगठन नेता सौदान सिंह को बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी है। सौदान सिंह पहले भी झारखंड के संगठनात्मक और राजनीतिक मामलों से जुड़े रहे हैं। उनका अनुभव नई टीम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

इस तरह झारखंड में केंद्रीय नेतृत्व ने एक साथ तीन स्तरों पर संगठनात्मक व्यवस्था को नया रूप दिया है—गजेंद्र पटेल को प्रदेश प्रभारी, पवन साय को संगठन महामंत्री और सौदान सिंह को पूर्वी भारत के व्यापक संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी।

आदिवासी के साथ कुड़मी समीकरण भी चुनौती

भाजपा के लिए झारखंड की चुनौती केवल आदिवासी राजनीति तक सीमित नहीं है। राज्य के सामाजिक समीकरणों में कुड़मी समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। भाजपा ने लंबे समय से आजसू प्रमुख सुदेश महतो के साथ राजनीतिक तालमेल के जरिए इस वर्ग तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश की है।

इसी बीच पड़ोसी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुड़मी समुदाय के करम महोत्सव में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सक्रिय मौजूदगी ने इस सामाजिक समूह को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज किया है। अधिकारी ने वहां कुड़मी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर घोषणाएं भी की हैं।

झारखंड में भाजपा के लिए यह समीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुदेश महतो के साथ गठबंधन के बावजूद कुड़मी राजनीति में नए चेहरे के रूप में जयराम महतो का उभार पार्टी के लिए एक अलग चुनौती बन चुका है। ऐसे में नई भाजपा टीम को आदिवासी और कुड़मी दोनों सामाजिक आधारों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की चुनौती का सामना करना होगा।

क्या 2029 की तैयारी अभी से?

पवन साय की नियुक्ति और उससे पहले गजेंद्र पटेल को झारखंड का प्रभारी बनाया जाना यह संकेत देता है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व झारखंड में संगठन को लंबी अवधि के नजरिए से पुनर्गठित करना चाहता है।

पार्टी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत चुनावी स्थिति को झारखंड के स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में किस तरह प्रभावी संगठन में बदला जाए।

नई टीम के सामने आदिवासी क्षेत्रों में संगठन का विस्तार, कुड़मी और अन्य सामाजिक समूहों के बीच पहुंच, बूथ नेटवर्क का पुनर्गठन, कार्यकर्ताओं में समन्वय और जमीनी स्तर पर पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की चुनौती होगी।

झारखंड में भाजपा का यह संगठनात्मक रीसेट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार पार्टी ने केवल चेहरे नहीं बदले हैं, बल्कि प्रभारी से लेकर संगठन महामंत्री तक राज्य की राजनीतिक रणनीति के प्रमुख स्तरों पर नई टीम उतारी है।

 

More from Breaking
Palamu Tiger Reserve recovers snares, arrows in anti-poaching patrol ahead of Dussehra

Palamu Tiger Reserve recovers snares, arrows in anti-poaching patrol ahead of Dussehra

October 18, 2026
Bokaro Steel Plant Blockade: Jharkhand HC acts during Puja holidays, all 11 gates reopened

Bokaro Steel Plant Blockade: Jharkhand HC acts during Puja holidays, all 11 gates reopened

October 18, 2026
CM Hemant Soren performs traditional dashakarma rituals for late mother Rupi Soren in Nemra

CM Hemant Soren performs traditional dashakarma rituals for late mother Rupi Soren in Nemra

October 18, 2026

Stay informed. Get Jharkhand's top stories in your inbox.

Free. No spam. Unsubscribe anytime.

About the Author

Suman Shrivastava