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वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की केंद्र से तीन प्रमुख मांगें: खनन सेस का अधिकार बहाल हो, GST नुकसान की भरपाई मिले

द झारखंड स्टोरी नेटवर्क नई दिल्ली, 19 सितंबर: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से खनन पर सेस लगाने…

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की केंद्र से तीन प्रमुख मांगें: खनन सेस का अधिकार बहाल हो, GST नुकसान की भरपाई मिले

Radha Krishna Kishore

द झारखंड स्टोरी नेटवर्क

नई दिल्ली, 19 सितंबर: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से खनन पर सेस लगाने का राज्य का अधिकार बहाल करने, GST से हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करने और G-Ram-G योजना में 90:10 के फंडिंग अनुपात को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्यों को वित्तीय रूप से सशक्त किए बिना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

किशोर ने ये मांगें नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा 18 और 19 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय “Financing the Journey to a Developed India” सम्मेलन में उठाईं। सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री के अलावा विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों ने हिस्सा लिया।

‘पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग जरूरी’

सम्मेलन को संबोधित करते हुए किशोर ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल मजबूत अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ एक समान अवसरों वाला और सशक्त समाज तैयार करना भी जरूरी है।

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उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय, GDP, विनिर्माण उत्पादन और वित्तीय आंकड़े तभी सार्थक हैं, जब समाज की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आकलन भी किया जाए। उन्होंने आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

किशोर ने कहा कि देश के विकास के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्यों की आर्थिक जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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खनन और कर नीतियों से राजस्व पर असर

झारखंड के वित्तीय हितों का मुद्दा उठाते हुए किशोर ने कहा कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को 20,000 करोड़ से 22,000 करोड़ रुपये के संभावित आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र और कर नीतियों में किए गए बदलावों का राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र से खनन पर सेस लगाने का राज्य का अधिकार बहाल करने की मांग की। साथ ही GST से संबंधित राजस्व नुकसान की भरपाई और G-Ram-G योजना में 90:10 के फंडिंग अनुपात को फिर से लागू करने का आग्रह किया।

झारखंड की वित्तीय उपलब्धियों का भी उल्लेख

वित्त मंत्री ने झारखंड की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य नीति आयोग की ‘Achiever’ श्रेणी में है। उन्होंने कहा कि राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है और पूंजीगत व्यय भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

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उन्होंने कहा कि राज्यों की वित्तीय क्षमता मजबूत किए जाने से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश बढ़ाने पर जोर

किशोर ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सिंचाई, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी अधिक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है। देश के विकास के आंकड़ों के साथ-साथ आम लोगों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी विकास के मूल्यांकन का आधार बनाया जाना चाहिए।

किशोर ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य राज्यों को मजबूत और वित्तीय रूप से सशक्त किए बिना हासिल नहीं किया जा सकता।

सम्मेलन में झारखंड के प्रतिनिधिमंडल में वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव करण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव चंद्रभूषण प्रसाद तथा वित्त मंत्री के निजी सचिव अनिर्बान आइच और नरेंद्र कुमार शामिल थे।

 

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Suman Shrivastava