झारखंड हाईकोर्ट का रामगढ़ की औद्योगिक इकाइयों की साल में दो बार जांच का आदेश
द झारखंड स्टोरी नेटवर्क रांची, सितंबर 14 : झारखंड हाईकोर्ट ने Ramgarh की दो औद्योगिक इकाइयों की साल में दो बार जांच…
द झारखंड स्टोरी नेटवर्क
रांची, सितंबर 14 : झारखंड हाईकोर्ट ने Ramgarh की दो औद्योगिक इकाइयों की साल में दो बार जांच करने का निर्देश Jharkhand State Pollution Control Board (JSPCB) को दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक इकाई की कम से कम एक जांच बिना पूर्व सूचना के की जाए और क्षेत्र में वायु तथा जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
Chief Justice M. S. Sonak और Justice Rajesh Shankar की Division Bench ने Ramgarh में औद्योगिक इकाइयों से कथित वायु और जल प्रदूषण के खिलाफ दायर Public Interest Litigation का निपटारा करते हुए ये निर्देश दिए। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से संबंधित औद्योगिक इकाइयों की ओर से किसी जारी वैधानिक उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती है।
Ramgarh की औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच के निर्देश
कोर्ट ने JSPCB के Regional Officer, Hazaribagh को Bihar Foundry and Casting Limited और Dayal Steel Limited की प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में दो बार जांच करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक इकाई की कम से कम एक जांच बिना पूर्व सूचना के करनी होगी।
जांच में stack emissions, जहां लागू हो वहां effluent तथा pollution-control और continuous monitoring equipment की कार्यप्रणाली को शामिल किया जाएगा।
प्रत्येक जांच की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर JSPCB के Member Secretary के समक्ष रखनी होगी। यदि किसी वर्ष निर्धारित जांच नहीं होती है तो Regional Officer को इसकी वजह लिखित रूप में बतानी होगी।
48 घंटे से अधिक प्रदूषण स्तर बढ़ने पर कार्रवाई
High Court ने निर्देश दिया है कि Bihar Foundry and Casting Limited तथा जहां Continuous Emission Monitoring System स्थापित है, वहां Dayal Steel Limited का emission monitoring data JSPCB के server से लगातार जुड़ा रहना चाहिए।
यदि प्रदूषण उत्सर्जन निर्धारित सीमा से 48 घंटे से अधिक समय तक ऊपर रहता है, तो Board को इसकी जानकारी मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित औद्योगिक इकाई को show-cause notice जारी करना होगा। संबंधित इकाई को जवाब देने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। जवाब नहीं मिलने पर Board लागू पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकेगा।
VIVA International School के आसपास पानी की दोबारा जांच
कोर्ट ने VIVA International School के आसपास पहले जांचे गए जल स्रोतों और दोनों औद्योगिक इकाइयों के किसी भी चिन्हित discharge point से पानी के नमूनों की नए सिरे से जांच का भी निर्देश दिया है।
यह sampling आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर किसी accredited laboratory के माध्यम से कराई जाएगी। जहां River Damodar से संबंधित क्षेत्र होगा, वहां औद्योगिक क्षेत्र के upstream और downstream से भी नमूने लिए जाएंगे। नमूने लिए जाने के एक महीने के भीतर रिपोर्ट Deputy Commissioner, Ramgarh को सौंपनी होगी।
यदि प्रदूषण का कारण industrial discharge पाया जाता है तो Board को environmental compensation के आकलन समेत आवश्यक कार्रवाई शुरू करनी होगी। वहीं यदि प्रदूषण municipal sources से जुड़ा पाया जाता है तो रिपोर्ट Drinking Water and Sanitation Department को आगे की कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।
वायु गुणवत्ता पर कोर्ट ने जताया संतोष
PIL में आरोप लगाया गया था कि Ramgarh की औद्योगिक इकाइयों से जहरीला धुआं, धूल और गैसें निकल रही हैं, जिससे आसपास के इलाके प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि Ramgarh एक औद्योगिक शहर है, जहां residential areas, schools, public institutions और jail भारी औद्योगिक इकाइयों के आसपास स्थित हैं।
हालांकि, कोर्ट ने JSPCB के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि दोनों औद्योगिक इकाइयों के पास वैध और प्रभावी Consents to Operate मौजूद हैं। निरीक्षण और analytical test reports में भी air emissions से संबंधित निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुपालन की पुष्टि हुई।
22 से 31 जुलाई 2025 के बीच Continuous Ambient Air Quality Monitoring Station से प्राप्त आंकड़ों में ambient particulate matter निर्धारित वैधानिक सीमा के भीतर पाया गया।
वहीं water quality को लेकर कोर्ट ने कहा कि VIVA International School के आसपास fluoride, total dissolved solids और nitrate का स्तर निर्धारित सीमा से मामूली अधिक पाया गया। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि इसका कारण industrial discharge, geogenic factors या municipal sources में से कौन-सा है।
पर्यावरण की लगातार निगरानी पर जोर
High Court ने कहा कि पर्यावरणीय क्षति प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहती और प्रदूषण का असर उसके स्रोत से दूर रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। कोर्ट ने River Damodar का उल्लेख करते हुए कहा कि यह Ramgarh और Bokaro तथा Dhanbad से होकर गुजरती है और अंततः West Bengal में प्रवेश करती है।
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा पर्यावरण कानून प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए पर्याप्त मजबूत हैं, बशर्ते enforcement agencies तत्परता और प्रभावी तरीके से काम करें।
कोर्ट ने औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उसने स्पष्ट किया कि जारी निर्देश किसी नए regulatory regime को लागू करने के लिए नहीं, बल्कि मौजूदा statutory monitoring mechanism को नियमित और प्रभावी बनाए रखने के लिए हैं।
JSPCB को चार महीने में compliance report देनी होगी
Member Secretary, JSPCB को High Court के समक्ष चार महीने के भीतर compliance affidavit दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसमें कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति और किसी भी चूक तथा उसके कारणों का उल्लेख करना होगा।
याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी गई है कि यदि कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं होता है या कथित प्रदूषण का कोई नया मामला सामने आता है तो वह मौजूदा मामले में interlocutory application के माध्यम से High Court का रुख कर सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश सक्षम अधिकारियों को कानून के अनुसार अतिरिक्त कड़ी कार्रवाई करने से नहीं रोकेंगे। इसमें नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ criminal prosecution भी शामिल है।


