East Singhbhum schools to remain closed on October 28 and 29 amid cyclone warningCyclone Arnab impacts Jharkhand; rain and gusty winds sweep KolhanPalamu civil surgeon suspends Jeevan Jyoti Nursing Home’s registration for three daysModel Degree College in Palamu awaits academic take-off nearly two years after takeoverCM Hemant Soren felicitates winners at All India Police Archery Championship in RanchiSona Devi University launches vigilance awareness week with focus on integrityVijaya Gardens Chitransh Parivaar to celebrate Chitragupta Puja on Nov. 11Tata Steel surveys nearly 4.9 lakh houses in intensified dengue prevention drive

जुड़वां, बड़े परिवार और गायब उपनाम: पलामू में SIR के दौरान सामने आ रहे दिलचस्प मामले

झारखंड स्टोरी नेटवर्क डाल्टनगंज, 15 सितंबर: मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) शिविरों की ओर क्यों दौड़ रहे हैं? वजह साफ…

जुड़वां, बड़े परिवार और गायब उपनाम: पलामू में SIR के दौरान सामने आ रहे दिलचस्प मामले

Representative image

झारखंड स्टोरी नेटवर्क

डाल्टनगंज, 15 सितंबर: मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) शिविरों की ओर क्यों दौड़ रहे हैं? वजह साफ है—हर मतदाता यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका नाम मतदाता सूची से बाहर न हो जाए।

कोई हाथ थामकर शिविर पहुंच रहा है तो कोई घुटनों में दर्द के बावजूद सत्यापन कराने आ रहा है। वहीं 2024 में पहली बार मतदान करने वाले Gen Z मतदाता कई बार हंसते-मुस्कुराते हुए आते हैं और यह देखकर हैरान होते हैं कि उनके बड़े-बुजुर्ग मतदाता सूची से नाम कटने को लेकर इतने चिंतित क्यों हैं।

पलामू में चल रहा SIR अभियान मतदाता सत्यापन के दौरान कई दिलचस्प और कभी-कभी मनोरंजक मामले सामने ला रहा है।

Stay informed. Get Jharkhand's top stories in your inbox.

Free. No spam. Unsubscribe anytime.

जुड़वां भाई–बहन बन रहे आकर्षण का केंद्र

पलामू क्लब स्थित SIR शिविर में सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी अमरदीप बलहोत्रा ने बताया कि नोटिस के जवाब में जब जुड़वां भाई-बहन शिविर पहुंचते हैं तो वे तुरंत लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं।

बलहोत्रा ने कहा, “नोटिस मिलने के बाद जुड़वां शिविर में आते हैं। उनके आते ही लोगों का ध्यान उन पर चला जाता है। जुड़वां भी इसका आनंद लेते हैं।”

Advertisement
Advertisement

उनके अनुसार, अब तक सत्यापन के लिए आने वाले करीब हर 100 मतदाताओं में एक जोड़ी जुड़वां सामने आई है।

हालांकि, दस्तावेज खासकर जन्मतिथि से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करने के दौरान जुड़वां मतदाताओं में चिंता साफ दिखाई देती है।

बलहोत्रा ने कहा, “उनकी जन्मतिथि एक ही होती है और दोनों के जन्म के बीच केवल कुछ मिनट का अंतर होता है। यह अंतर जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज नहीं होता, लेकिन इसे लेकर जुड़वां मतदाताओं की चिंता साफ दिखाई देती है।”

Advertisement
Advertisement

छह या उससे अधिक बच्चों वाले परिवार भी चुनौती

पांच से अधिक बेटे-बेटियों वाले परिवारों के मामले जुड़वां बच्चों के मामलों से भी अधिक सामने आ रहे हैं।

निर्वाचक पदाधिकारी के अनुसार, “20 ऐसे परिवारों में करीब तीन मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें पांच से अधिक बेटे-बेटियां हैं। ऐसे मामलों में कंप्यूटर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। छह या उससे अधिक लिंक मिलने पर सिस्टम लाल निशान दिखाता है।”

इसके बाद SIR टीम छह या उससे अधिक जुड़े परिवार के सदस्यों की उम्र की जांच शुरू करती है। अधिकारी के अनुसार, यदि बच्चे जुड़वां नहीं हैं तो उनकी उम्र के बीच का अंतर सामान्यतः कम से कम नौ महीने होना चाहिए।

उपनाम गायब होने से परिवार परेशान

इस संवाददाता को एक धोबी परिवार से जुड़े एक ऐसे मतदाता का मामला भी देखने को मिला, जिसके नाम से उपनाम गायब हो गया था।

2003 की मतदाता सूची में मतदाता के नाम के साथ “हवारी” उपनाम दर्ज था। हालांकि, ड्राफ्ट मतदाता सूची में यह उपनाम गायब था।

मतदाता के पुलिस कांस्टेबल बेटे ने कहा, “हम धोबी हैं। हवारी हमारी पहचान है। हमारे पेशे को हर कोई जानता है। लेकिन SIR में यहां हम ऊपर से नीचे तक पसीना-पसीना हो रहे हैं।”

SIR शिविरों में महिलाएं अधिक सक्रिय

बिश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि SIR शिविरों में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं।

उन्होंने कहा, “जब तक उनके मामले का समाधान नहीं हो जाता, ये महिलाएं आपस में नई-नई बातें और किस्से साझा करती रहती हैं।”

पुराने दस्तावेज भी बन रहे चुनौती

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 1969 से पहले जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को लेकर कोई अनिवार्यता नहीं थी।

भारत सरकार ने 1969 में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम लागू किया, जिसके तहत जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया।

SIR के दौरान कई मतदाता ऐसे जन्म प्रमाणपत्रों की खराब फोटोकॉपी भी जमा कर रहे हैं, जिनमें नाम और जन्मतिथि स्पष्ट रूप से पढ़ना मुश्किल हो रहा है।

SIR शिविर में तैनात एक सहायक ने कहा, “फोटोकॉपी में बेहद छोटे अक्षरों में लिखे नाम और तारीखें SIR टीम की आंखों के लिए काफी परेशानी पैदा कर रही हैं।”

कुल मिलाकर, SIR अभियान मतदाताओं और अधिकारियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। साथ ही इस प्रक्रिया ने लोगों को यह भी एहसास कराया है कि किसी दस्तावेज में दर्ज हर जानकारी का अपना महत्व होता है और जरूरत पड़ने पर वही विवरण मतदाता की पहचान और रिकॉर्ड के सत्यापन में निर्णायक साबित हो सकता है।

 

More from Breaking
East Singhbhum schools to remain closed on October 28 and 29 amid cyclone warning

East Singhbhum schools to remain closed on October 28 and 29 amid cyclone warning

October 27, 2026
Cyclone Arnab impacts Jharkhand; rain and gusty winds sweep Kolhan

Cyclone Arnab impacts Jharkhand; rain and gusty winds sweep Kolhan

October 27, 2026
Palamu civil surgeon suspends Jeevan Jyoti Nursing Home’s registration for three days

Palamu civil surgeon suspends Jeevan Jyoti Nursing Home’s registration for three days

October 27, 2026

Stay informed. Get Jharkhand's top stories in your inbox.

Free. No spam. Unsubscribe anytime.

About the Author

Suman Shrivastava