बरी होने के बावजूद हिरासत में महिला: झारखंड HC ने पूछा- किस कानून के तहत रखा, गृह सचिव को तलब किया
सुमन श्रीवास्तव रांची, 1 अक्टूबर: झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महिला को आपराधिक मामले में बरी किए जाने के बावजूद हजारीबाग…
सुमन श्रीवास्तव
रांची, 1 अक्टूबर: झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महिला को आपराधिक मामले में बरी किए जाने के बावजूद हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में हिरासत में रखे जाने पर गंभीर सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर किस कानूनी अधिकार के तहत महिला को बरी होने के बाद भी हिरासत में रखा गया है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अखिल कुमार की खंडपीठ ने यह टिप्पणी W.P. (Cr.) (D.B.) (HB) No. 582 of 2026 की सुनवाई के दौरान की। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अपुर्व विवेक ने दायर की है। याचिका में हिरासत में रखी गई महिला रीना देवी को अदालत के समक्ष पेश करने और तत्काल रिहा करने की मांग की गई है।
मामले में महिला के साथ कथित तौर पर हिरासत के दौरान यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किए जाने के आरोप पर भी अदालत ने संज्ञान लिया और जांच के निर्देश दिए। अदालत ने झारखंड सरकार के गृह सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
बरी होने के बाद भी हिरासत पर हाईकोर्ट का सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी ने वर्चुअल माध्यम से पेश होकर, अधिवक्ता अंकित अपूर्व की सहायता से अदालत को बताया कि G.R. Case No. 1647 of 2025, जो Lohsinghna थाना कांड संख्या 88/2025 से संबंधित है, में बरी किए जाने के बावजूद रीना देवी अभी भी हिरासत में हैं।
इस पर हाईकोर्ट ने राज्य से स्पष्ट रूप से पूछा कि आपराधिक मामले में बरी होने के बाद महिला को किस कानूनी अधिकार के तहत हिरासत में रखा गया है और वह जेल में है या डिटेंशन सेंटर में।
खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा:
“हम संविधान के अनुच्छेद 21 के युग में रह रहे हैं और किसी व्यक्ति को प्राप्त अंतर्निहित स्वतंत्रता को कानून के अधिकार के बिना छीना नहीं जा सकता।”
कथित हिरासत में दुष्कर्म के आरोप की जांच का आदेश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि रीना देवी के साथ वर्ष 2020 से 2022 के बीच कथित तौर पर दो वर्षों तक रंजीत महतो नामक एक कांस्टेबल ने दुष्कर्म किया। याचिका में इस संबंध में शिकायत किए जाने की बात भी कही गई है।
आरोप की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि वे हजारीबाग DLSA के सचिव और उनकी टीम को महिला से पूछताछ कर उसका बयान दर्ज करने के लिए भेजें।
JHALSA की सदस्य सचिव वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुईं और बताया कि DLSA सचिव अपनी टीम के साथ महिला का बयान दर्ज करने के लिए जांच करने गए हैं।
हजारीबाग SP ने जांच का दिया भरोसा
पुलिसकर्मी पर लगाए गए आरोप को देखते हुए अदालत ने हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक को भी वर्चुअल माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया।
SP अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और कहा कि रंजीत महतो के खिलाफ लगाए गए कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की तत्काल और विस्तृत जांच शुरू की जाएगी।
उन्होंने अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि डिटेंशन सेंटर में महिला की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी।
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए IG, जेल भी अदालत में मौजूद रहे और उन्हें भी कार्यवाही में शामिल होने को कहा गया।
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता-III आशुतोष आनंद ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य मामले की पूरी जांच कराएगा।
गृह सचिव 5 अक्टूबर को अदालत में होंगे पेश
मामले में पुलिस अधिकारी से जुड़े आरोप और महिला की बरी होने के बाद भी जारी हिरासत को देखते हुए हाईकोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव/गृह सचिव, झारखंड सरकार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
उन्हें 5 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे अदालत में पेश होने को कहा गया है। मामले की सुनवाई उस दिन की पहली केस के रूप में होगी।
अदालत ने DLSA की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। हजारीबाग SP की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की जाएगी।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे 5 अक्टूबर 2026 को पहली केस के रूप में सूचीबद्ध किया है।
गौरतलब है कि अदालत के आदेश में महिला की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया गया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कथित हिरासत में यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म के आरोपों को अभी प्रमाणित तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।


