झारखंड की किशोरियों को मुफ्त सैनिटरी पैड का इंतजार, कैबिनेट फैसले के दो हफ्ते बाद भी नहीं जारी हुई अधिसूचना
झारखंड स्टोरी नेटवर्क डाल्टनगंज, सितंबर 15: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरियां इस उम्मीद में हैं कि सरकार जल्द ही…
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झारखंड स्टोरी नेटवर्क
डाल्टनगंज, सितंबर 15: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरियां इस उम्मीद में हैं कि सरकार जल्द ही उन्हें मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएगी। राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के करीब दो सप्ताह बाद भी योजना के क्रियान्वयन को लेकर अधिसूचना, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और फंड आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हो सकी है।
राज्य मंत्रिमंडल ने हाल की बैठक में पात्र किशोरियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कैबिनेट के फैसले के बाद अभी तक विभाग की ओर से औपचारिक अधिसूचना या योजना के संचालन की विस्तृत रूपरेखा जारी नहीं की गई है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों पर अधिक बोझ
सूत्रों के अनुसार, सैनिटरी पैड की कीमत और हर महीने होने वाला खर्च आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की किशोरियों के लिए बड़ी चुनौती है। ब्रांडेड सैनिटरी पैड का एक पैकेट सामान्यतः करीब 40 से 45 रुपये में मिलता है।
कई किशोरियों ने इस संवाददाता से कहा कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए सैनिटरी पैड जरूरी हैं और सरकार को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की योजना जल्द शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “मैयां सम्मान योजना है, जिसका उद्देश्य काफी हद तक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। लेकिन स्वच्छता के लिए सैनिटरी पैड जरूरी हैं। राज्य सरकार को हमें मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की शुरुआत करनी चाहिए।”
स्थानीय स्तर पर भी तैयार किए जा सकते हैं सैनिटरी पैड
किशोरियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान सखी मंडलों की भूमिका को भी याद किया। उनका कहना था कि उस समय कई सखी मंडलों ने कपड़े के मास्क तैयार किए थे, जो बाजार में उपलब्ध मास्क की तुलना में आरामदायक और टिकाऊ थे।
कुछ किशोरियों का मानना है कि सोखने वाले और रिसावरोधी कपड़े का इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर सैनिटरी पैड भी तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए किसी जटिल तकनीक या इंजीनियरिंग की आवश्यकता नहीं है।
उनका कहना है कि यदि सरकार मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराती है, तो परिवारों पर हर महीने पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। बचाई गई राशि का इस्तेमाल नोटबुक, बॉल पेन और रिफिल जैसी जरूरी शैक्षणिक सामग्री खरीदने में किया जा सकता है।
शिक्षा विभाग में बजट आवंटन पर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि योजना को लागू करने के लिए आवश्यक बजट आवंटन को लेकर राज्य शिक्षा विभाग की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
त्योहारी मौसम नजदीक आने के साथ सरकारी स्कूलों की किशोरियां अब कैबिनेट के फैसले के धरातल पर उतरने और मुफ्त सैनिटरी पैड की सुविधा मिलने का इंतजार कर रही हैं।

