2500 अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में, झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC-JSSC भर्ती जांच की धीमी रफ्तार पर जताई चिंता
सुमन श्रीवास्तव रांची, 15 सितंबर: झारखंड हाईकोर्ट ने 2,500 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को प्रभावित करने वाले भर्ती मामले की जांच…
सुमन श्रीवास्तव
रांची, 15 सितंबर: झारखंड हाईकोर्ट ने 2,500 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को प्रभावित करने वाले भर्ती मामले की जांच की धीमी पड़ती रफ्तार पर मंगलवार को चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर मामले में जांच न केवल तेज होनी चाहिए, बल्कि अच्छी गति से आगे बढ़नी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जांच की शुरुआत में प्रगति काफी तेज थी, लेकिन बाद में इसकी रफ्तार कम हो गई।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम चार सप्ताह का समय मांगा गया। राज्य की ओर से दलील दी गई कि आपराधिक जांच जारी होने के कारण फिलहाल जवाब दाखिल करना मुश्किल है। हालांकि, कोर्ट ने मामले को लंबा खींचने के बजाय 18 सितंबर को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
2500 से अधिक अभ्यर्थियों के करियर पर फैसला
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिट याचिका में उसका मुख्य सरोकार उस अधिसूचना की वैधता या अवैधता की जांच करना है, जिसके कारण 2,500 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं।
कोर्ट ने कहा कि विज्ञापन ही रद्द कर दिया गया है और उसके आधार पर की गई नियुक्तियां भी स्वतः प्रभावित हुई हैं। हालांकि, कथित बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों के बावजूद यह मान लेना उचित नहीं होगा कि नियुक्त किए गए सभी अभ्यर्थी किसी अनियमितता में शामिल थे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कई अभ्यर्थी वास्तविक और योग्य हो सकते हैं, जिन्हें कथित गड़बड़ी के कारण नियुक्ति नहीं मिल सकी। इसी पहलू की जांच के लिए आपराधिक जांच चल रही है।
सीलबंद लिफाफे में जांच की स्टेटस रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता की ओर से आपराधिक जांच की स्टेटस/प्रोग्रेस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश की गई। कोर्ट ने रिपोर्ट को खोलकर उसका अवलोकन किया और फिर उसे दोबारा सीलबंद कर दिया।
कोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया, लेकिन स्पष्ट किया कि इसे याचिकाकर्ताओं के वकील के साथ साझा नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कोर्ट ने कहा कि जांच की शुरुआत में प्रगति तेज थी, लेकिन बाद में इसकी गति कम हो गई।
‘सिर्फ तेज नहीं, अच्छी गति से हो जांच’
कोर्ट ने गंभीर मामलों में जांच की गति को लेकर स्पष्ट टिप्पणी की।
अदालत ने कहा, “इस मामले और इस तरह के गंभीर मामलों में जांच तेज होनी चाहिए; सिर्फ तेज नहीं, बल्कि अच्छी गति से होनी चाहिए।”
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके समक्ष चल रही रिट कार्यवाही का मुख्य मुद्दा आपराधिक जांच के परिणाम पर फैसला करना नहीं, बल्कि नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचना की कानूनी वैधता तय करना है।
18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
कोर्ट ने मामले को 18 सितंबर को कई संबद्ध रिट याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
अदालत ने कहा कि यदि अगली सुनवाई तक उचित निर्देश प्राप्त नहीं होते हैं, तो महाधिवक्ता कानून के बिंदु पर कोर्ट की सहायता करेंगे।
कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि उसे उस अधिसूचना की वैधता पर फैसला करना है, जिससे 2,500 से अधिक अभ्यर्थियों का करियर प्रभावित हुआ है।
अंतरिम राहत जारी रहेगी
कोर्ट ने पहले दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया।
मामला सुभाष मुर्मू एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य, मुख्य सचिव के माध्यम से एवं अन्य है।

