मरांडी ने मुख्यमंत्री से Chief Information Commissioner की नियुक्ति की मांग की
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रांची, 18 सितंबर: नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को पत्र लिखकर Chief Information Commissioner की नियुक्ति में हो रही देरी पर चिंता जताई है। उन्होंने तत्काल संबंधित समिति की बैठक बुलाकर मुख्य सूचना आयुक्त के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने तथा Jharkhand State Information Commission में अपील और शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने की मांग की है।
Marandi ने कहा कि Information Commissioners की नियुक्ति के बावजूद Chief Information Commissioner की नियुक्ति नहीं होने के कारण आयोग में मामलों की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उन नागरिकों को इन नियुक्तियों का क्या लाभ मिलेगा, जिनकी अपील और शिकायतों की सुनवाई का इंतजार है।
मुख्यमंत्री के आश्वासन का दिया हवाला
Marandi ने पत्र में कहा कि Information Commissioners की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने विशेष रूप से Chief Information Commissioner की नियुक्ति का मुद्दा उठाया था। उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया था कि Chief Information Commissioner की नियुक्ति जल्द कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा, “हालांकि Information Commissioners की नियुक्ति के बाद भी Chief Information Commissioner की नियुक्ति नहीं हुई है और आयोग मामलों की सुनवाई शुरू नहीं कर पाया है। ऐसे में उन नागरिकों को इन नियुक्तियों का क्या लाभ मिलेगा, जो अपनी अपील और शिकायतों की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं?”
Marandi ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा करते हुए उन्होंने Information Commissioners की नियुक्ति संबंधी अनुशंसा पर अपनी सहमति दी और हस्ताक्षर किए थे।
उन्होंने कहा, “यदि मुझे पहले पता होता कि Chief Information Commissioner की नियुक्ति इस तरह लंबित रखी जाएगी और आयोग का काम शुरू नहीं होगा, तो मैंने उस समय इस पर हस्ताक्षर नहीं किए होते।”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए और अब एक जनप्रतिनिधि के तौर पर वह जनता को क्या जवाब दें, जो आयोग में अपने मामलों की सुनवाई का इंतजार कर रही है।
High Court में PIL का भी किया उल्लेख
Marandi ने इस मामले से संबंधित High Court में दायर Public Interest Litigation (PIL) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के आश्वासन के बाद अदालत ने मामले का निपटारा किया था।
उन्होंने कहा कि सरकार के आश्वासन के बाद यह उसकी जिम्मेदारी थी कि State Information Commission को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए।
Marandi ने सवाल किया, “यदि अब किसी नागरिक को दोबारा अदालत का रुख करना पड़े और लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़े, तो इस अतिरिक्त देरी के लिए जवाबदेह कौन होगा?”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस काम को सरकार समय पर पूरा कर सकती है, उसके लिए आम लोगों को बार-बार अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़े।
RTI के अधिकार पर असर का दावा
Leader of Opposition ने कहा कि Right to Information नागरिकों को सरकारी कामकाज से जुड़े सवाल पूछने और उनका जवाब पाने का अधिकार देता है। लेकिन आयोग में सुनवाई नहीं होने से इस अधिकार का प्रभावी इस्तेमाल प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा, “कई मामलों में समय पर सूचना नहीं मिलने पर सूचना मांगने का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। इस स्थिति को अनिश्चितकाल तक जारी रखना जनता के साथ अन्याय है।”
Marandi ने मुख्यमंत्री Hemant Soren से संबंधित समिति की तत्काल बैठक बुलाकर Chief Information Commissioner के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की। उन्होंने State Information Commission में अपील और शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने का भी आग्रह किया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और आयोग को पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा।
Marandi ने कहा, “उम्मीद है कि इस बार आपके आश्वासन के अनुरूप निश्चित समयसीमा के भीतर कार्रवाई की जाएगी और जनता को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए और इंतजार नहीं करना पड़ेगा।”

