हजारीबाग के ट्रैफिक अराजकता पर हाईकोर्ट सख्त, DC-SP को 17 निर्देश
द झारखंड स्टोरी नेटवर्क रांची, 29 सितंबर: हजारीबाग में लगातार बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए डिप्टी…
द झारखंड स्टोरी नेटवर्क
रांची, 29 सितंबर: हजारीबाग में लगातार बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए डिप्टी कमिश्नर (DC), पुलिस अधीक्षक (SP) और संबंधित अधिकारियों को 17 स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने शहर में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ट्रैफिक लाइट, CCTV निगरानी, पार्किंग व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने और पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती पर विशेष जोर दिया है।
ट्रैफिक लाइट ट्रायल के लिए चार महीने की समयसीमा
हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देशों में चार महीने के भीतर ट्रैफिक लाइट का ट्रायल शुरू करने का आदेश शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक नियंत्रण से जुड़े उपाय केवल प्रस्ताव और कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।
ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था का उद्देश्य शहर के प्रमुख और व्यस्त चौराहों पर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करना और यातायात दबाव को नियंत्रित करना है।
CCTV निगरानी पर हाईकोर्ट का जोर
कोर्ट ने महत्वपूर्ण ट्रैफिक प्वाइंटों पर CCTV कैमरों और प्रभावी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। CCTV के माध्यम से ट्रैफिक उल्लंघनों की निगरानी, संवेदनशील स्थानों की पहचान और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने की दिशा में काम करने को कहा गया है।
अदालत ने संकेत दिया कि केवल CCTV लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसका प्रभावी इस्तेमाल भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बेतरतीब पार्किंग पर लगाम
हाईकोर्ट ने पार्किंग की अव्यवस्था को भी गंभीरता से लिया है। अधिकारियों को पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा सड़क किनारे अनियंत्रित तरीके से वाहनों की पार्किंग पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर के व्यस्त इलाकों में सड़क पर वाहनों की पार्किंग से उपलब्ध सड़क स्थान कम होने और जाम की स्थिति पैदा होने की समस्या को देखते हुए यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अतिक्रमण हटाने का निर्देश
अदालत ने यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई पर भी जोर दिया है। प्रशासन और पुलिस को सार्वजनिक सड़कों तथा अन्य स्थानों पर यातायात बाधित करने वाले अनधिकृत कब्जों को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य अलग-अलग स्तर पर होने वाली कार्रवाई के बजाय प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
ट्रैफिक पुलिस की पर्याप्त तैनाती
हाईकोर्ट ने भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। खासकर प्रमुख चौराहों और अधिक ट्रैफिक दबाव वाले इलाकों में पुलिस की प्रभावी मौजूदगी से यातायात नियंत्रण बेहतर करने की उम्मीद है।
अस्थायी इंतजाम नहीं, समयबद्ध व्यवस्था
हाईकोर्ट के 17 निर्देशों में ट्रैफिक लाइट, CCTV निगरानी, पार्किंग प्रबंधन, अतिक्रमण नियंत्रण और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।
चार महीने के भीतर ट्रैफिक लाइट ट्रायल की समयसीमा तय किए जाने से प्रशासन के सामने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित हो गया है। वहीं, अन्य निर्देशों के जरिए हजारीबाग में दीर्घकालिक और समन्वित ट्रैफिक प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
अदालत के निर्देशों के केंद्र में DC और SP हैं, जिन्हें संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि हाईकोर्ट के निर्देशों का जमीन पर कितना और कितनी तेजी से असर दिखाई देता है।


