JSSC-CGL मामले में बदलते हलफनामों पर बाबूलाल मरांडी के सवाल, CBI जांच की मांग
द झारखंड स्टोरी नेटवर्क रांची, 19 सितंबर: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर अदालत…
द झारखंड स्टोरी नेटवर्क
रांची, 19 सितंबर: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर अदालत में राज्य सरकार की ओर से लगातार बदले जा रहे हलफनामों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार अब पूरी परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित मान रही है, तो पहले दाखिल किए गए हलफनामों में क्या सच्चाई थी और शुरुआत में पूरी जानकारी अदालत के समक्ष क्यों नहीं रखी गई।
मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी पोस्ट में पूरे मामले की CBI जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
मरांडी ने कहा कि यदि JSSC-CGL की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कथित तौर पर प्रभावित हुई थी, तो सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की भूमिका और जवाबदेही की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि शुरुआत में अदालत के समक्ष पूरी स्थिति क्यों नहीं रखी गई। क्या पहले दाखिल हलफनामे में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया था? उन्होंने यह भी पूछा कि जांच की दिशा शुरुआत में अलग क्यों रही और किसके कहने पर यह स्थिति बनी।
ये सवाल मरांडी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में इन्हें नहीं देखा जा सकता।
CID जांच पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पहले हुई CID जांच पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं, तो शुरुआती जांच में ये तथ्य सामने क्यों नहीं आए।
उन्होंने आशंका जताई कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच में चुनिंदा तथ्यों को सामने लाया जा सकता है। मरांडी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जांच की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर भी सवाल
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इतने बड़े स्तर पर कथित भर्ती अनियमितता क्या शीर्ष स्तर की जानकारी या सहमति के बिना संभव थी।
उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी तो प्रशासनिक निगरानी की स्थिति क्या थी और यदि जानकारी थी तो समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी कथित भर्ती अनियमितता केवल अब तक गिरफ्तार किए गए निचले स्तर के लोगों के माध्यम से संचालित हो सकती थी। उन्होंने पूछा कि भर्ती व्यवस्था में अध्यक्ष और सचिव जैसे वरिष्ठ पदों की भूमिका की भी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।
CBI जांच और अधिकारियों को हटाने की मांग
मरांडी ने पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि JSSC और JPSC जैसी भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता केवल स्पष्टीकरण या बयानों से बहाल नहीं होगी, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आने और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई से ही भरोसा कायम होगा।
उन्होंने प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को JSSC से हटाने तथा मनोज कौशिक को ADG, CID के पद से हटाने की मांग भी की।
मरांडी ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी अध्यक्षों और जिम्मेदार अधिकारियों, जिसमें अनुराग गुप्ता भी शामिल हैं, की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जिनके खिलाफ जांच में साक्ष्य मिले, उन्हें कानून के अनुसार आरोपी बनाया जाए और गिरफ्तारी तथा अभियोजन की कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पद, प्रभाव या राजनीतिक-सामाजिक संबंधों के आधार पर किसी को जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।


