Jharkhand High Court acquits Pakur man in rape case, sets aside 10-year sentenceMorning mist, partly cloudy skies likely across Jharkhand; isolated rain on October 15Three tiger cubs born at Tata Steel Zoological Park; public invited to suggest namesSona Devi University organises anti-drug awareness programme to promote healthy, addiction-free livingFactionalism threatens to diminish Utkal Association’s Durga Puja grandeur in JamshedpurPalamu police probe forgery of residential certificate for electoral roll revisionHomeless woman gives birth to baby boy in Daltonganj railway station parking areaTata Power, Imperial College London partner to advance next-generation energy innovation

सुप्रीम कोर्ट: गिरफ्तारी के आधार लिखित में देना जरूरी, दोबारा गिरफ्तारी से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य

THE JHARKHAND STORY NETWORK नई दिल्ली, 21 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए…

सुप्रीम कोर्ट: गिरफ्तारी के आधार लिखित में देना जरूरी, दोबारा गिरफ्तारी से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य

THE JHARKHAND STORY NETWORK

नई दिल्ली, 21 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराने होंगे। यदि लिखित आधार नहीं देने के कारण गिरफ्तारी अवैध घोषित कर व्यक्ति को रिहा किया जाता है, तो पुलिस उसे अपने स्तर पर दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। पुनः गिरफ्तारी के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंद्रकुर की पीठ ने सोमवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देना अनिवार्य संवैधानिक सुरक्षा है। इसका पालन नहीं होने पर गिरफ्तारी अवैध हो जाती है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।

गिरफ्तारी के आधार लिखित में देना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस को व्यक्ति को यह बताना होगा कि उसे किन ठोस आधारों पर गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालत के अनुसार, केवल गिरफ्तारी के सामान्य कारण बताना पर्याप्त नहीं है। गिरफ्तार व्यक्ति को वे तथ्य और आधार उपलब्ध कराए जाने चाहिए जिनके आधार पर जांच अधिकारी ने उसकी गिरफ्तारी आवश्यक समझी।

Stay informed. Get Jharkhand's top stories in your inbox.

Free. No spam. Unsubscribe anytime.

अदालत ने कहा कि लिखित आधार गिरफ्तार व्यक्ति को ऐसी भाषा में उपलब्ध कराए जाने चाहिए जिसे वह समझता हो। सामान्य परिस्थितियों में गिरफ्तारी के समय या उसके तुरंत बाद लिखित आधार देना होगा। विशेष परिस्थितियों में यदि तत्काल लिखित रूप में देना संभव नहीं हो, तो गिरफ्तारी के आधार मौखिक रूप से बताए जा सकते हैं, लेकिन उन्हें बाद में लिखित रूप में देना होगा और किसी भी स्थिति में मजिस्ट्रेट के समक्ष रिमांड के लिए पेश किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले उपलब्ध कराना होगा।

अवैध गिरफ्तारी के बाद सीधे दोबारा गिरफ्तारी नहीं

पीठ ने कहा कि यदि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराने के कारण पहली गिरफ्तारी अवैध घोषित कर दी जाती है और व्यक्ति को रिहा किया जाता है, तो जांच एजेंसी को दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया का पालन करना होगा।

Advertisement
Advertisement

पुलिस को पहले संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन देना होगा और पुनः गिरफ्तारी की अनुमति प्राप्त करनी होगी। आवेदन में यह भी स्पष्ट करना होगा कि पहली गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी के आधार क्यों नहीं बताए गए थे। साथ ही, पुनः गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी के लिखित आधार उपलब्ध कराना होगा।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पुनः गिरफ्तारी के लिए दायर आवेदन पर प्रारंभिक गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी के तत्काल वरिष्ठ अधिकारी का अनुमोदन भी होना चाहिए।

उसी अधिकारी को दोबारा गिरफ्तारी का अधिकार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था के पीछे संवैधानिक सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि जब अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन करने वाला अधिकारी ही बाद में पुनः गिरफ्तारी का निर्णय लेने की स्थिति में हो, तो संवैधानिक सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। इसलिए पुनः गिरफ्तारी की प्रक्रिया को न्यायिक निगरानी में रखना आवश्यक है।

Advertisement
Advertisement

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन के लिए गिरफ्तार व्यक्ति को अलग से यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि उसे वास्तविक नुकसान या पूर्वाग्रह हुआ है। गिरफ्तारी के आधार की जानकारी पाने का अधिकार स्वयं एक मौलिक संवैधानिक सुरक्षा है।

पुलिस अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश

पीठ ने कहा कि जिस पुलिस अधिकारी ने गिरफ्तारी के समय निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया, उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। अदालत ने इस तरह की कार्रवाई को गिरफ्तारी की प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी माना।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी कहा है कि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराने की संवैधानिक आवश्यकता सभी अपराधों और विशेष कानूनों के तहत की जाने वाली गिरफ्तारियों पर लागू होती है। इसमें PMLA और UAPA जैसे विशेष कानून भी शामिल हैं।

 

More from Breaking
Jharkhand High Court acquits Pakur man in rape case, sets aside 10-year sentence

Jharkhand High Court acquits Pakur man in rape case, sets aside 10-year sentence

October 14, 2026
Morning mist, partly cloudy skies likely across Jharkhand; isolated rain on October 15

Morning mist, partly cloudy skies likely across Jharkhand; isolated rain on October 15

October 14, 2026
Three tiger cubs born at Tata Steel Zoological Park; public invited to suggest names

Three tiger cubs born at Tata Steel Zoological Park; public invited to suggest names

October 14, 2026

Stay informed. Get Jharkhand's top stories in your inbox.

Free. No spam. Unsubscribe anytime.

About the Author

Suman Shrivastava