झारखंड का बालूमाथ कोयले की धूल में घुटा, कारोबारियों ने बंद रखा बाजार
THE JHARKHAND STORY NETWORK डाल्टनगंज, 18 सितंबर: झारखंड के लातेहार जिले का कोयला क्षेत्र बालूमाथ शुक्रवार को एक असामान्य बंद का गवाह…
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डाल्टनगंज, 18 सितंबर: झारखंड के लातेहार जिले का कोयला क्षेत्र बालूमाथ शुक्रवार को एक असामान्य बंद का गवाह बना। धूल प्रदूषण, लगातार बढ़ते शोर और दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान कारोबारियों ने मुख्य बाजार में अपनी दुकानें बंद रखकर स्वच्छ हवा और जाम से राहत की मांग उठाई।
यह बंद सिर्फ कारोबार बंद रखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बालूमाथ में कोयला परिवहन से पैदा हो रही पर्यावरणीय और जनजीवन से जुड़ी समस्याओं को भी सामने ले आया। कारोबारियों का कहना है कि वे कोयला उद्योग के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भारी वाहनों की लगातार आवाजाही को बाजार क्षेत्र से बाहर करने के लिए बाइपास जरूरी है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पिछले करीब तीन दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है जब छोटे-बड़े कारोबारियों ने मुख्य रूप से धूल, शोर और सड़क जाम की समस्या को लेकर सामूहिक रूप से बाजार बंद रखा।
कोयला वाहनों से धूल, शोर और जाम
NH 22 बालूमाथ के मुख्य बाजार से होकर गुजरता है। इलाके में CCL की कोलियरियां भी हैं और कोयले से लदे तथा खाली टिपर ट्रक रेलवे कोल साइडिंग की ओर लगातार आते-जाते रहते हैं।
कारोबारियों के अनुसार, इन भारी वाहनों की चौबीसों घंटे आवाजाही से बाजार में धूल, शोर और जाम की समस्या लगातार बनी रहती है।
बालूमाथ के कारोबारी Chandrakant Gupta alias Monu Babu ने कहा कि खाली और कोयले से लदे टिपर ट्रकों की लगातार आवाजाही के कारण बाजार में हर समय शोर और जाम की स्थिति बनी रहती है।
एक स्थानीय निवासी ने फोन पर कहा, “पहली समस्या धूल है। यह स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। यहां गमछे से ज्यादा रुमाल की जरूरत पड़ती है। बालूमाथ बाजार में छींकते लोग आम दृश्य हैं।”
कारोबारी बोले– कोयला उद्योग चले, लेकिन बाजार बचे
कारोबारियों ने साफ किया कि उनका विरोध कोयला उद्योग से नहीं है। उनकी मांग है कि कोयला परिवहन जारी रहे, लेकिन भारी वाहनों के लिए ऐसा वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए जिससे मुख्य बाजार प्रभावित न हो।
Monu Babu ने कहा, “हम कोयला उद्योग के खिलाफ नहीं हैं। इसे फलने-फूलने दें। हम चाहते हैं कि कम से कम बाजार क्षेत्र के लिए बाइपास बनाया जाए, जिससे टिपर ट्रकों की आवाजाही बाजार से बाहर हो सके।”
कारोबारियों का कहना है कि बाइपास बनने से न केवल धूल और शोर में कमी आएगी, बल्कि बाजार में लगने वाले जाम से भी राहत मिल सकती है।
DC ने माना– कारोबारियों की समस्या जायज
Latehar DC Sandip Kumar ने कारोबारियों की समस्या को जायज बताया।
उन्होंने कहा, “उनकी समस्याएं जायज हैं। यह NH 22 है। कोयला वाहन यहां चौबीसों घंटे चलते हैं।”
बाइपास की मांग पर DC ने कहा कि इसके लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं होना बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा, “बाइपास के लिए कोई उपयुक्त जमीन नहीं है। इसने स्थिति को जटिल बना दिया है।”
धूल नियंत्रण के लिए हर दो घंटे पानी का छिड़काव
धूल की समस्या से तत्काल राहत के लिए जिला प्रशासन ने कोयला ऑपरेटरों को sprinkler system लगाने और NH 22 के बाजार क्षेत्र तथा उसके आसपास के हिस्सों में हर दो घंटे पानी का छिड़काव करने को कहा है।
DC Sandip Kumar ने कहा, “कोयला ऑपरेटरों को सामुदायिक कल्याण के उपायों के लिए आगे आना चाहिए।”
प्रशासन का मानना है कि नियमित पानी के छिड़काव से भारी वाहनों की आवाजाही से उठने वाली धूल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
NH 22 पर अतिक्रमण भी बड़ी समस्या
बालूमाथ में जाम की समस्या के पीछे सड़क किनारे अतिक्रमण भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है।
जब DC से पूछा गया कि क्या NH 22 पर अतिक्रमण भी समस्या है, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के कहा, “यह बहुत बड़ी समस्या है।”
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही, बाजार की गतिविधियों और सड़क पर अतिक्रमण के कारण मुख्य बाजार क्षेत्र में यातायात प्रबंधन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
शांतिपूर्ण रहा बाजार बंद
बालूमाथ थाना प्रभारी Anubhav Sinha ने कहा कि बाजार बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इस दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई।
उन्होंने कहा, “यह शांतिपूर्ण बंद है। कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।”
बालूमाथ के कारोबारियों का शुक्रवार का बंद कोयला परिवहन और स्थानीय जनजीवन के बीच बढ़ते तनाव को सामने लाता है। कारोबारियों की मांग है कि कोयला उद्योग की गतिविधियां जारी रहें, लेकिन इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे शहर के मुख्य बाजार को धूल, शोर और भारी वाहनों के जाम की कीमत न चुकानी पड़े।

